आज का संदेश TODAY'S MESSAGE

नराकास वार्षिक राजभाषा पुरस्कार - TOLIC ANNUAL OL AWARDS 2009-10

Tuesday, November 24, 2009

नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, कोयंबत्तूर की अर्द्ध-वार्षिक बैठक

Half-Yearly Meeting of the Town Official Language Implementation Committee, Coimbatore

नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति की अगली अर्द्ध-वार्षिक बैठक दिनांक 1-12-2009 को अपराह्न 2:00 बजे कम्यूनिटी हाल, बी।एस.एन.एल. स्टॉफ क्वार्टर्स (पी.एंड टी. क्वार्टर्स), एन.एस.आर. रोड, साई बाबा कालोनी, कोयंबत्तूर-641011 (दूरभाष/Phone:2432466, 2443700) में आयोजित की जाएगी। भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा जारी निदेशों के अनुपालन में कार्यालय प्रधान का बैठक में उपस्थित होना अनिवार्य है।

Half-Yearly meeting of the TOLIC, Coimbatore will be convened on 1-12-2009 at 2:00 p.m. at the Community Hall, BSNL Staff Quarters (P & T Quarters), NSR Road, Sai Baba Colony, Coimbatore - 641 011 (Ph. No: 2432466, 2443700). In compliance with the directions issued by the Govt. of India, Ministry of Home Affairs, Dept. of Official Language, the Head of the Office has to attend the meeting. Hence it is requested kindly to attend the above said meeting without fail.

Wednesday, October 14, 2009

पुदुच्चेरी में क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन एवं राजभाषा पुरस्कार वितरण संपन्न

राष्ट्रीय स्वाभिमान और सुविधा की दृष्टि से हिंदी ही उपयुक्त संपर्क भाषा होगी – अजय माकन

जवाहरलाल नेहरु स्नातकोत्तर चिकित्सकीय शिक्षा एवं शोध संस्थान (जिपमेर), पुदुच्चेरी के प्रेक्षागृह में क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन का उद्घाटन आज सुबह 10 बजे माननीय केंद्रीय गृह राज्यमंत्री श्री अजय माकन जी ने द्वीप प्रज्वलन के साथ किया ।
भारत एक विशाल देश है, जहाँ कई भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती है किंतु भारत की सभी भाषाओं की आत्मा एक ही है, जो भारतीयता का समान संदेश देती रही हैं । हमारी सामासिक संस्कृति का केंद्र बिंदु एक ही रहा है, भले ही इसकी अभिव्यक्ति का माध्यम विभिन्न भाषाएँ रही हों । हमारे महान देश में भाषाओं की विभिन्नता इसकी मूलभूत एकता में कभी बाधक नहीं रही है । इनके भीतर भारतीयता सतत रूप से प्रवाहित रही है । इस एकता में भारतीय भाषाओं में रचित साहित्य का बड़ा योगदान रहा है । यदि हम भारती की विभिन्न भाषाओं में रचित साहित्य पर दृष्टि डालें, तो यह तथ्य सहज ही स्पष्ट हो जाएगा कि कश्मीर से कन्याकुमारी और सौराष्ट्र से कामरूप तक सभी लेखकों और कवियों ने अपनी रचनाओं में समसामयिक विचारधारा से प्रभावित होकर अपनी-अपनी भाषाओं में अपने विचारों की अभिव्यक्ति की है ।
हमें संघ की राजभाषा हिंदी के साथ-साथ सभी अन्य भाषाओं-बोलियों का संरक्षण भी करना है ताकि विकास, रोजगार और पनर्वास की प्रक्रिया के कारण ये विलुप्त न हो जाए । भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं होती है । अपितु इससे बोलने वालों की संस्कृति और संस्कार भी जुड़े होते हैं ।
हमारे देश के संविधान ने हम सबके ऊपर भारतीय भाषाओं के विकास का दायित्व सौंपा है । इस जिम्मेदारी का निर्वाह हमें धैर्य, लगन और विवेकपूर्ण ढंग से करना है । कोई भी भाषा तभी समृद्ध हो सकती है और जनता द्वारा उसका तभी स्वागत होता है जब वह अपने आपको पुराने मापदंडों से बांध कर न रखे । हिंदी के स्वरूप में भी भारतीय समाज और संस्कृति की विविधता और एकता, विज्ञान और प्रौद्योगिकी की पारिभाषिक स्पष्टता, दर्शन और धर्म की व्यापकता प्रतिबिंबित होनी चाहिए । संपर्क भाषा के रूप में हिंदी का व्यापक प्रयोग सदैव से ही होता रहा है । यहां तक कि अंग्रेजों को भी अपना शासन चलाने के लिए टूटी-फूटी ही सही पर हिंदी ही हितकर लगी और आज बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने उत्पादकों को बेचने के लिए हिंदी व अन्य भाषाओं का प्रयोग कर रही हैं । अप भारत के किसी भी प्रांत में चले जाएं, वहाँ आपकों हिंदी का प्रयोग अवश्य मिलेगा । हिंदी का व्यापक जनाधार और यह धीरे-धीरे परंतु निश्चित रूप से बढ़ता ही जा रहा है ।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वराज, स्वदेशी और स्वभाषा पर जोर दिया गया था । उस समय यह समझा गया था कि बिना स्वदेशी व स्वभाषा के स्वराज सार्थक नहीं होगा । हमारे राष्ट्रीय नेताओं की यह दृढ़ धारणा थी कि कोई भी देश अपनी स्वतंत्रता को अपनी भाषा के अभाव में मौलिक रूप से परिभाषित नहीं कर सकता, उसे अनुभव नहीं कर सकते । उन महापुरुषों की मान्यता थी कि यदि हमें भारत में एक राष्ट्र की भावना सुदृढ़ करनी है तो एक संपर्क भाषा होना नितांत आवश्यक है और राष्ट्रीय स्वाभिमान और सुविधा की दृष्टि से हिंदी ही उपयुक्त संपर्क भाषा होगी । उन महापुरुषों में नेताजी सुभाषचंद्र बोस जी का नाम विशेष रूप से स्मरणीय है । उन्होंने कहा था “अगर आज हिंदी भाषा मान ली गई तो इसलिए नहीं कि वह किसी प्रांत विशेष की भाषा है, बल्कि इसलिए कि वह अपनी सरलता, व्यापकता तथा क्षमता के कारण सारे देश की भाषा है ।”
हिंदी और भारतीय भाषाओं के संवर्धन एवं विकास में दक्षिस भारत के संतों, मनीषियों आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा है । यहाँ के अनेक साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य की सभी विधाओं पर उत्कृष्ट साहित्य की रचना की है । उनके कृतित्व व व्यक्तित्व से भारतीय संस्कृति, साहित्य, भाषा और कला को संबल मिला है जिससे जन-साधारण लाभान्वित हुआ है । हिंदी प्रचार-प्रसार के कार्य में स्वैच्छिक हिंदी संस्थाओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है । तमिलनाडु, केरल, आंद्र प्रदेश, कर्नाटक आदि प्रांतों की हिंदी की स्वैच्छिक संस्थाओं ने इस संबंध में अपनी विशिष्ट भूमिका निभाई है । इन संस्थाओं के माध्यम से हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं का पारस्परिक आदान-प्रदान, समन्वय एवं सामंजस्य बढ़ा है । परिणामस्वरूप हिंदीतर भाषा लोगों में हिंदी के प्रति इन संस्थाओं से जुड़े व्यक्तियों ने जिस निष्ठा एवं समर्पणभाव से राष्ट्रीय महत्व के इस कार्य को आगे बढ़ाया है, उसके लिए उनकी जितनी प्रशंसा की जाए, कम है ।
मैं मानता हूँ कि कोई भी राष्ट्र अपना भाषा के बिना गूंगा हो जाता है । विचारों की अभिव्यक्ति रुक जाती है । कोई भी लोकतांत्रिक व्यवस्था लोकभाषा के अभाव प्रभावहीन हो जाता है । स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हमने लोकतांत्रिक व्यवस्था अपनाई है । हमारी व्यवस्था लोक-कल्याणकारी है । सरकार की कल्याणकारी योजनाएं तभी प्रभावी मानी जाएंगी जब आम जनता उनसे लाभान्वित होगी । इसके लिए आवश्यक है कि शासन का काम-काज आम जनता की भाषा में निष्पादित किया जाए ।
एक जनतांत्रिक देश की सरकार और शासन को, जनता की भावनाओं के प्रति निरंतर सजग रहना पड़ता है । शासन एवं प्रशासन और जनता के मध्य संपर्क के लिए भाषा का बहुत ज्यादा महत्व है । शासन के कार्यक्रमों की सफलता या विफलता तथा शासन की छवि, इस पर निर्भर होते हैं कि उन्हें जनता कि कितना सहयोग मिलता है । हिंदी देश या प्रांतों की सीमाओं से बंधी नहीं है । यह एक उदारशील भाषा है जो अन्य भाषाओं से नित नए शब्द ग्रहण कर और अधिक संपन्न हो रही है । इससे हिंदी का विकासोन्मुखी रूप प्रकट होता है । इसे देश के विकास के सभी पहलुओं से जोड़ना है । अतः यह आवश्यक है कि विभिन्न कार्यक्षेत्रों से संबंधित विषयों के अनुरूप हिंदी में कार्यालय-साहित्य का निर्माण हो ।
संघ के राजकीय कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाना हमारा संवैधानिक व नैतिक दायित्व है । केंद्रित कार्यालयों, उपक्रमों, बैंकों आदि में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाना हमारा संवैधानिक व नैतिक दायित्व है । केंद्रीय कार्यालयों, उपक्रमों, बैंकों आदि में हिंगी के प्रयोग को बढ़ाने के लिए राजभाषा विभाग द्वारा विभिन्न योजनाएँ चलाई जाती हैं । प्रतिवर्ष एक वार्षक कार्यक्रम भी जारी किया जाता है । केंद्रीय सरकार के कार्यालयों में हिंदी का प्रयोग क्रमिक रूप से बढ़ रहा है लेकिन इसमें और तेजी लाने की आवश्यककता है । राजभाषा विभाग इस दिशा में प्रयत्नशील है । मुझे विश्वास है कि आप सभी के सहयोग से लक्ष्यों की प्राप्ति की प्राप्ति हो सकेगी ।
आज का युग सूचना प्रौद्योगिकी का युग है । हर क्षेत्र में इसका प्रयोग पढ़ता जा रहा है । हिंदी भाषा का प्रयोग बढ़ता जा रहा है । हिंदी भाषा का प्रयोग बढ़ाने के लिए भी सूचना प्रौद्योगिकी को अपनाना जरूरी हो गया है । अब तक कंप्यूटर पर हिंदी के प्रयोग के संबंध में आती रही अधिकांश समस्याओं का कारण मानक भाषा एनकोडिंग यानि यूनिकोड से भिन्न एनकोडिंग प्रयोग रहा है । आज के कंप्यूटर पर यूनिकोड में हिंदी प्रयोग करने की प्रभावी सुविधा उपलब्ध है । आवश्यकता है इन सुविधाओं के प्रयोग करने संबंधी जागरूकता की । अंग्रेजी प्रयोग को सूचना प्रौद्योगिकी में हुए विकास का पूरा लाभ मिला है । हिंदी प्रयोग के लिए भी ये सब सुविधाएँ उतनी ही सहजता से उपलब्ध हो सके इसके लिए अधिकारियों एवं विद्वानों को लेकर तीन समितियाँ गठित की गई है । ये समितियाँ हिंदी प्रयोगकर्ता की साफ्टवेयर संबंधी आवश्यकताओं की प्रभावी पूर्ति एवं हिंदी प्रयोगकर्ता में तकनीकी प्रयोग संबंधी जागरूकता पैदा करने के संबंध में सुझाव देंगी । मुझे यकीन है कि इन सुझावों पर अमल हिंदी प्रयोगकर्ता तक सूचना प्रौद्योगिकी में हुए विकास के लाभ को पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान होगा ।
यह अच्छी बात है कि हम हर क्षेत्र में विशेष उपलब्धियाँ हासिल करने वालों को सम्मानित करते हैं । सम्मेलन में आज कई संगठनों ने पुरस्कार प्राप्त किए हैं । मैं पुरस्कार प्राप्त करने वालों को पुनः बधाई देता हूँ । पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं का यह दायित्व बनता है कि वे अपने पूरे संगठन में राजभाषा हिंदी के प्रयोग-प्रसार को स्थायी रूप दें और अन्य संगठनों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करें । शेष संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों के अपेक्षा है कि वे संविधान द्वारा सौंपे गए इस दायित्व का निर्वाह उसी निष्ठा और तत्परता से करें जिस निष्ठा से वि अपने अन्य दायित्वों को निभाते हैं ।
अपने अध्यक्षीय भाषण में सचिव, राजभाषा विभाग डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में हिंदी के भविष्य को लेकर चिंता के स्वर सर्वत्र सुनाई पड़ रहे हैं, मगर इस संबंध में किसी चिंता या परेशानी की जरूरत नहीं है । जब तक भारतीय संस्कृति का अस्तित्व रहेगा, तब तक हिंदी और भारतीय भाषाएँ जिंदा रहेंगी । आज विदेशी मुल्क हमारे देश की ओर आकर्षित हो रहे हैं । बहु-राष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारत बहुत बड़ा बाजार है । ग्रामीण जनता के साथ उनकी भाषा में बातचीत करने में ही इन कंपनियों की सफलता निर्भर करेगी । इस आलोक में भारतीय भाषाओं का भविष्य उज्जवल है ।
केंद्रीय विद्यालय की नन्हीं छात्राओं द्वारा भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ । राजभाषा विभाग के सचिव डॉ. प्रदीप कुमार जी की अध्यक्षता में संपन्न उद्घाटन सत्र में राजभाषा विभाग के संयुक्त सचिव श्री डी.के. पांडेय जी ने स्वागत भाषण दिया । जिपमेर के निदेशक डॉ. के.एस.वी.के. सुब्बाराव जी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित किया । दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में राजभाषा कार्यान्वयन की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट डॉ. वी. बालकृष्णन, उप निदेशक (कार्यान्वयन) ने प्रस्तुत की । अंत में केंद्रीय विद्यालय, पुदुच्चेरी के छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की ।
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता राजभाषा विभाग के सचिव डॉ. प्रदीप कुमार जी ने किया । विचार-विमार्श पर केंद्रित इस सत्र में डॉ. बालशौरि रेड्डी जी ने तमिलनाडु में हिंदी के उद्भव और विकास पर तथा डॉ. एम.के. श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (वि.प्र.), ने भाषा, संस्कृति, समाज और स्वास्थ्य – एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर व्याख्यान दिए । इसी सत्र में दक्षिण क्षेत्र में राजभाषा कार्यान्वयन की रिपोर्ट डॉ. विश्वनाथ झा, उप निदेशक (कार्यान्वयन) ने प्रस्तुत की । अंत में डॉ. वी. बालकृष्णन, उप निदेशक (कार्यान्वयन) के धन्यवाद ज्ञापन के साथ सम्मेलन सुसंपन्न हुआ ।
दि.9 अक्तूबर, 2009 को पुदुच्चेरी में क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन के अवसर पर माननीय गृह राज्य मंत्री, श्री अजय माकन जी के करकमलों से राजभाषा पुरस्कार (वर्ष 2008-09) प्राप्त करनेवाले कार्यालयों की सूची इस प्रकार है ।
दक्षिण क्षेत्र (आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक)
सरकारी कार्यालय वर्ग
राष्ट्रीय रेशमकीट बीच संगठन, बैंगलूर – प्रथम
कुक्कुट परियोजना निदेशालय, हैदराबाद – द्वितीय
मुख्य नियंत्रण सुविधा, अंतरिक्ष विभाग, हासन – तृतीय
उपक्रम
भारतीय कपास निगम लिमिटेड, शाखा कार्यालय, आदिलाबाद – प्रथम
प्रतिभूति मुद्रणालय, हैदराबाद – द्वितीय
भारत संचार निगम लि., विजयवाडा – तृतीय
बैंक
कार्पोरेशन बैंक, आंचलिक कार्यालय, हुबली – प्रथम
कार्पेरेशन बैंक, आंचलिक कार्यालय, उडुपि – द्वितीय
भारतीय स्टेट बैंक, स्थानीय प्रधान कार्यालय, हैदराबाद – तृतीय
नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति
भद्रावती-शिमोगा (सरकार कार्यालय) – प्रथम
हैदराबाद (बैंक) – द्वितीय
बैंगलूर (कार्यालय) – तृतीय
दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र (तमिलनाडु, केरल, पांडिच्चेरी एवं लक्ष्यद्वीप केंद्रशासी प्रदेश)
सरकारी कार्यालय
मुख्य आयकर आयुक्त का कार्यालय, तिरुवनंतपुरम – प्रथम
राष्ट्रीय कैडेट कोर निदेशालय, केरल और लक्षद्वीप, तिरुवनंतपुरम – प्रथम
मुख्य आयकर आयुक्त का कार्यालय, कोचिन – तृतीय
उपक्रम
प्रधान महाप्रबंधक, भारत संचार निगम लिमिटेड, कोलिक्केड – प्रथम
हिंदुस्तान न्यूजप्रिंट लिमिटेड, कोट्टयम - द्वितीय
हिंदुस्तान इन्सेक्टिसाइड्स लिमिटेड, कोचिन – तृतीय
बैक
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, क्षेत्रीय कार्यालय, एरणाकुलम – प्रथम
सिंडिकेट बैंक, क्षेत्रीय कार्यालय, कोयंबत्तूर – द्वितीय
कार्पोरेशन बैंक, अंचल कार्यालय, कोचिन – तृतीय
नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति
कालीकट (कार्यालय) – प्रथम
चेन्नै (बैंक) – द्वितीय
पुदुच्ची (कार्यालय) – तृतीय

प्रस्तुति – डॉ. सी. जय शंकर बाबु, संपादक, युग मानस

Friday, September 25, 2009

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन, इरूगुर इन्स्टलेशन में हिंदी पखवाड़ा संपन्न

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन, इरूगुर इन्स्टलेशन में हिंदी पखवाड़ा २००९ का आयोजन सितंबर १ से १५ तक किया गया । हिंदी पखवाड़ा का उद्घाटन डिपो प्रबंधक श्री एस वी वेंकटेश कुमारजी ने किया । पखवाड़े का आयोजन करने का उद्देश्य कार्यालय में राजभाषा कार्य कैसे करते हैं , क्या करना हैं , प्रदान कार्यालय द्वारा घोषित हिंदी कार्य करने पर दिये जाने वाले प्रोत्साहन योजनाओं के बारे में उन्होंने सदस्यों को सूचना दी ।

सभा का स्वागत श्री अर्जुन बाबु ने किया और श्री के एस बैजू , हिंदी समन्वयक ने धन्यवाद अदा किया ।
पखवाड़ा के दौरान आयोजित प्रस्नोत्तरी प्रतियोगिता तथा मूकाभिनय प्रतियोगिता में सभी स्टाफ सदस्यों ने भाग लिया । समापन सभा में विजेताओं को पुरस्कार दिया और प्रतियोगिता में भाग लिये सदस्यों को प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया गया ।

Sunday, September 13, 2009

हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ

हिंदी दिवस का संकल्प

भारतीय संस्कृति एवं विरासत की रक्षा तथा भारत की सार्थक उन्नति के लिए संकल्पबद्ध भारतीय संविधान की मूलभावना भारतीय भाषाओं की श्रीवृद्धि के पक्ष में है । आइए आज हम संकल्प करें भारतीय भाषाओं के विकास के लिए प्रतिबद्ध होने का, भारतीय भाषाओं का निष्ठापूर्वक प्रयोग, प्रचार एवं प्रसार करने का । हमारे प्रयासों से जनमानस की भाषाएं विकसित हो, भारत की एकता एवं अखंडता बनी रहे ।

Wednesday, September 2, 2009

नराकास, कोयंबत्तूर की सूचना-प्रौद्योगिकी कार्यशाला सुसंपन्न

कार्यशाला उद्घाटन सत्र को अध्यक्ष एवं प्रतिभागियों का स्वगत करते हुए सदस्य-सचिव डॉ. बाबु



कार्यशाला के उद्घाटन के अवसर पर दीप प्रज्वलन करते हुए अध्यक्ष नराकास श्री बी.एस.वी. शर्मा



कार्यशाला के उद्घाटन के अवसर पर दीप प्रज्वलन करते हुए नराकास के सदस्य-सचिव डॉ. सी. जय शंकर बाबु


प्रतिभागियों को अध्यक्ष महोदय का संबोधन


प्रतिभागी

प्रतिभागी

समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री सी.एन. रवींद्रनाथ जी


सूचना प्रौद्योगिकी कार्यशाला सुसंपन्न

नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, कोयंबत्तूर के सदस्य कार्यालयों के पदधारियों के प्रशिक्षण हेतु आयोजित सूचना प्रौद्योगिकी कार्यशाला का आज दि. 2 सितंबर, 2009 की सुबह 10 बजे शुभारंभ हुआ । भारत संचार निगम लिमिटेड के साई बाबा कालोनी स्थित सम्मेलन कक्ष में श्री बी.एस.वी. शर्मा, अध्यक्ष, नराकास, कोयंबत्तूर एवं क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ औपचारिक उद्घाटन किया गया । उद्घाटन कार्यक्रम में समिति के सदस्य-सचिव डॉ. सी. जय शंकर बाबु ने अतिथियों का स्वागत किया एवं कार्यशाला की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला । श्री शर्मा जी ने अपने वक्तव्य में कहा आज सूचना प्रद्योगिकी का इतना विकास हो चुका है कि वह हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है । हिंदी भाषा के लिए यूनिकोड का प्रयोग करते हुए हम राजभाषा कार्यान्वयन की दिशा में भी प्रगति हासिल कर सकते हैं । ई-मेल, वेबसाइट आदि के लिए भी हिंदी का प्रयोग आज बहुत आसान है । ऐसी कार्यशालाओं के माध्यम से सीखने सुअवसर जो प्राप्त होता है, उसका सदुपयोग करें तथा राजभाषा के विकास में अपना योगदान दें ।
समिति के सदस्य-सचिव डॉ. सी. जय शंकर बाबु ने अपने वक्तव्य में कहा कि कंप्यूटर एवं इंटरनेट के क्षेत्र में भारतीय भाषाओं का विकास हुआ है । भाषाई कंप्यूटिंग के लिए कई साधन आन-लाइन एवं ऑफ-लाइन में भी उपलब्ध हैं । ऐसे साधनों की जानकारी एवं प्रयोग की चेतना बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यशाला में प्रतिभागी यूनिकोड का प्रयोग एवं अनुवाद औजारों के इस्तेमाल का कौशल हासिल कर सकते हैं ।
इस कार्यशाला में कुल अठारह पदधारियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया । भाषाई कंप्यूटिंग के लिए उपलब्ध संसाधनों तथा यूनिकोड प्रयोग के महत्व के संबंध में डॉ. सी. जय शंकर बाबु ने तथा डाटाबेसेज के संबंध में श्री संदीप कुमार ने पवरपाइंट प्रस्तुति के माध्यम से व्याख्यान दिए । समापन सत्र में श्री सी.ए. रवींद्रनाथ, संयुक्त निदेशक, कर्मचारी राज्य बीमा निगम, कोयंबत्तूर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे । उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि हिंदी सीखना बहुत आसान है । सूचना प्रौद्योगिकी का जो ज्ञान हिंदी कार्यशाला में अर्जित किया है, उसका सदुपयोग करते हुए राजभाषा कार्यान्वयन में विशिष्ट प्रगति हासिल की जा सकती है । प्रतिभागियों की प्रतिक्रियाओं एवं प्रमाणपत्र वितरण एवं राष्ट्रगान के आलाप के साथ ही कार्यशाला सुसंपन्न हुई ।

सलीम अली पक्षि-विज्ञान एवं प्राकृतिक विज्ञान केंद्र, कोयंबत्तूर में राजभाषा कार्यान्वयन के बढ़ते कदम



हर दिन एक हिंदी शब्द सीखें

LEARN A HINDI WORD A DAY


राजभाषा कार्यान्वयन के संबंध में महामहिम राष्ट्रपति के आदेशों के अनुपालन में सलीम अली पक्षि-विज्ञान एवं प्राकृतिक विज्ञान केंद्र, कोयंबत्तूर ने प्रभारी निदेशक डॉ. पी.ए. अजीज ने दि.२.९.२००९ को हर दिन एक हिंदी शब्द सीखें प्रशिक्षण बोर्ड का शुभारंभ किया । इस बोर्ड का प्रदर्शन केंद्र के स्वगत कक्ष में स्टॉफ सदस्यों, अध्येताओं तथा आगंतुकों के लिए हर दिन आसानी से हिंदी के शब्द सीखने हेतु किया गया है ।
In compliance of Presidential Order on implementation of Official Language, Dr. P.A. Azeez, Director in charge has inaugurated the “LEARN A HINDI WORD A DAY” training board on 02.09.2009. The board is displayed at the Reception for easy learning of Hindi words on daily use by all staff and scholars of SACON and visitors.

Wednesday, August 26, 2009

वार्तालाप प्रतियोगिता के परिणाम

दि.26.8.2009 को वस्त्र आयुक्त के क्षेत्रीय कार्यालय में वार्तालाप प्रतियोगिता का आयोजन किया गया । प्रतियोगिता में विभिन्न कार्यालयों के प्रतिभागियों ने भागीदारी ली । प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार हैं –

प्रथम पुरस्कार –
द्वितीय पुरस्कार –
तृतीय पुरस्कार –
सभी प्रतिभागियों का अभिनंदन एवं विजेताओं को बधाइयाँ ।